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Vigyan ke chamatkar essay in hindi विज्ञान के चमत्कार निबंध PDF

450 शब्दों में विज्ञान के चमत्कार निबंध रूपरेखा सहित कक्षा 7वीं, 8वीं, 9वीं 10वी के लिए हिंदी में। Vigyan ke chamatkar essay for class 7th, 8th, 9th and 10th in hindi.

[रूपरेखा – (1) प्रस्तावना, (2) आवागमन के साधन, (3) बिजली वरदान स्वरूप, (4) कृषि में योगदान, (5) चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान, (6) श्रम की बचत, (7) अन्तरिक्ष के क्षेत्र में योगदान, (8) विज्ञान से हानि, (9) उपसंहार।]

प्रस्तावना – आज विज्ञान का युग है। विज्ञान ने विश्व में सभी क्षेत्रों में अपनी विजय पताका फहरा रखी है। यह अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आज के युग को यदि हम वैज्ञानिक युग का नाम दे दें। प्राचीन और आधुनिक काल में पूर्णत: विपरीतता आ गयी है। रहन-सहन, वस्त्र पहनावा, यातायात तथा जीवन प्रणाली पूर्णतः परिवर्तित हो गई है। उसमें नवीनता का समावेश हो चुका है। आज की दुनिया प्रतिक्षण बदलती दिखती है। परिवर्तन ही विकास है।

आवागमन के साधन-आज आवागमन के साधन भी विज्ञान की कृपा से सर्वसुलभ हो गये हैं। रेल, मोटर साइकिल, स्कूटर, तथा वायुयान इस क्षेत्र में अभूतपूर्व चुनौती दे रहे हैं। राष्ट्रीय पर्वो एवं शोक के अवसर पर समस्त राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्षों का एक मंच पर उपस्थित होना इस बात का ज्वलन्त उदाहरण है।

बिजली वरदान स्वरूप -बिजली प्रतिपल एक दासी की भाँति सेवा में जुटी रहती है। कारखाने, रेडियो, टेलीविजन बिजली

की सहायता से चलते हैं। बिजली से चलने वाले पंखे दुपहरी में निरन्तर चलकर मानव को परम शान्ति प्रदान कर रहे हैं।,

कृषि में योगदान – कृषि के लिए नये यन्त्र विज्ञान ने आविष्कृत किये हैं। विज्ञान द्वारा उपलब्ध रासायनिक खाद्य उत्पादन क्षमता में एवं रासायनिक दवाइयाँ फसल को नष्ट होने से रही हैं।

चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान – एक्स-रे शरीर का आन्तरिक फोटो लेकर अनेक बीमारियों का पता लगा रहा है। कैंसर तथा एड्स जैसे रोगों पर निरन्तर शोध जारी है। परमाणु शक्ति भी विज्ञान की ही देन है।

श्रम की बचत – विज्ञान के द्वारा आविष्कृत मशीनों के माध्यम से पूरे दिन का कार्य मनुष्य कुछ ही घंटों में समाप्त कर लेता है। बचे हुए समय को मनुष्य मनोरंजन या स्वाध्याय में व्यतीत करता है।

अन्तरिक्ष के क्षेत्र में योगदान -अन्तरिक्ष के क्षेत्र में भी आज मनु पुत्र अपने कदम बढ़ा चुका है। जो चन्दा मामा कभी बालकों के लिए अगम बना हुआ था, आज वैज्ञानिक उसके तल पर पहुँचने में सक्षम हुए हैं।

विज्ञान से हानि – हर अच्छाई के पीछे बुराई छिपी है। जहाँ विज्ञान ने मनुष्य को अनेक सुख सुविधाएँ प्रदत्त की हैं, वहाँ अशान्ति तथा दुःख का भी सृजन किया है।

अगर हम सावधानीपूर्वक विचार करें तो विदित होता है कि इसमें विज्ञान का इतना दोष नहीं है जितनी कि मानव की कुत्सित प्रवृत्तियाँ दोषी हैं।

उपसंहार – विज्ञान स्वयं में अच्छा-बुरा नहीं है। यह मानव के प्रयोग पर निर्भर है। आज विज्ञान के गलत प्रयोग के फलस्वरूप ही दुनिया में विनाशकारी दृश्य नजर आ रहा है। अतः आज हमें विज्ञान को मानव के कल्याण के निमित्त प्रयोग करके सुख एवं समृद्धि का साधन बनाना है। इसी में सबका हित सन्निहित है।

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