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घर्षण (भौतिक विज्ञान) – Friction in hindi

जब एक पिण्ड दुसरे पिण्ड के ऊपर फिसलता है या फिसलने का प्रयास करता है तो उसके संपर्क तलों के मध्य एक बल कार्य करता है जो पिण्डों के सापेक्ष गति का विरोध करता है। इस गति विरोधक बल को ही घर्षण या घर्षण बल कहते हैं।

घर्षण का कारण

संसार में ऐसी कोई चीज नहीं है जो पुर्णतः चिकनी हो। प्रत्येक सतह पर आण्विक अनियमितता होती है। जब एक सतह दूसरी सतह के सम्पर्क में आती है तो आण्विक अनियमितता के कारण उनमें अन्तर्ग्रथन (Interlocking) हो जाता है। और इसी अन्तर्ग्रथन के कारण गति विरोधी बल कार्य करने लगता है जिसे घर्षण बल कहते है।

स्थैतिक, सीमांत एवं गतिक घर्षण

स्थैतिक घर्षण– जब एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड पर चलाने का प्रयास किया जाता है फिर भी पहला पिण्ड विरामावास्था में ही रहता है तो दोनों पिण्डों के सम्पर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को स्थैतिक घर्षण कहते हैं।

सीमांत घर्षण– जब एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड पर चलाने का प्रयास किया जाता है और पहला पिण्ड ठीक चलने को तैयार होता है तो इस स्थिति को सीमांत संतुलन की स्थिति कहते हैं। सीमांत संतुलन की स्थिति में कार्य करने वाले घर्षण को सीमांत घर्षण (Limiting Friction) कहते हैं।

गतिक घर्षण– जब एक पिण्ड दूसरे पिण्ड के चलता है तो दोनों पिण्डों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को गतिक घर्षण कहते हैं। गतिक घर्षण का मान सदैव सीमांत घर्षण के मान से कम होता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  1. घर्षण सदैव आरोपित बल के विपरीत दिशा में कार्य करता है।
  2. सीमांत घर्षण का मान अधिकतम होता है।
  3. गतिक घर्षण का मान सदैव सीमांत घर्षण के मान से कम होता है।
  4. यह सदैव गति का विरोध करता है।

सर्पी और बेलन घर्षण (Sliding and Rolling Friction)

जब एक पिण्ड दुसरे पिण्ड पर ‘फिसलता’ है तो उनके सम्पर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को सर्पी घर्षण कहते हैं। यदि एक पुस्तक को टेबल पर सरकाया जाये तो टेबल और पुस्तक के बीच लगने वाला घर्षण सर्पी घर्षण कहलाएगा।

जब किसी एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड के तल पर घुमाया जाता या घुमाने का प्रयास किया जाता है तो दोनों पिण्डों के बीच कार्य करने वाले घर्षण को बेलन घर्षण (Rolling Fiction) कहते हैं।

सर्पी घर्षण और बेलन घर्षण में अंतर

No.सर्पीबेलन
1.जब एक पिण्ड दुसरे पिण्ड पर ‘फिसलता’ है तो उनके सम्पर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को सर्पी घर्षण कहते हैं।जब किसी एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड के तल पर घुमाया जाता  तो दोनों पिण्डों के बीच कार्य करने वाले घर्षण को बेलन घर्षण कहते हैं।
2.फिसलने वाले पिण्ड का तल सदैव दूसरे पिण्ड के संपर्क में रहता है।घुमने वाले पिण्ड के भिन्न-भिन्न भाग दुसरे पिण्ड के सम्पर्क में क्रमशः आते हैं।
3.सर्पी घर्षण का मान अधिक होता है।बेलन घर्षण का मान कम होता है।

घर्षण के लाभ और हानि (Advantages and disadvantages of fiction)

घर्षण से हानियाँ बहुत हैं किन्तु लाभ अनेकों हैं। यदि घर्षण नहीं होता तो हम पृथ्वी पर चल नहीं पाते। सापेक्ष में घर्षण से लाभ निम्न्लिखित हैं –

लाभ-

  1. पैरों और जमीन के मध्य घर्षण होने के कारण ही हम पृथ्वी पर चल पाते हैं।
  2. घर्षण के कारण ही हम भोजन को चबा पाते हैं।
  3. इसके कारणआग उत्पन्न करते हैं।
  4. घर्षण के कारण ही वाहनों पर ब्रेक लगाकर उन्हें रोक पाते हैं।
  5. इसके कारण ही ढलान सतह पर उतरने में मदद मिलती है।

घर्षण से हानि

  1. घर्षण के कारण मशीनों के कल पुर्जे घिसते हैं।
  2. इसके कारण मशीनों की दक्षता कम होती है।
  3. घर्षण के कारण मशीनों को दी गयी उर्जा का कुछ भाग ऊष्मा के रूप में व्यय हो जाता है।
  4. इसके कारण ही हमारे जूते या चप्पल के तल्ले घिस जाते हैं।

घर्षण कम करने के उपाय

घर्षण को निम्न प्रकार से कम किया जा सकता है-

पालिश करके– सम्पर्क तलों की पालिश करके घर्षण को कम किया जा सकता है। इस विधि द्वारा सम्पर्क तलों के मध्य अन्तर्ग्रथन (Interlocking) कम हो जाता है।

बाल बियरिंग का उपयोग करके – इस विधि में दो समाक्षीय सिलेंडर होते हैं। दोनों के मध्य कठोर स्पात के छर्रे लगे होते हैं। वाहन से जुडी धुरी आंतरिक सिलेंडर पहिये से दृढ़तापूर्वक पिट रहती हैं। बहरी सिलिंडर पहिये से दृढ़तापूर्वक जुड़ा होता है। जब धुरी दक्षिणावर्त दिशा में घूमती है वामावर्त दिशा में घूमने लगते हैं। फलस्वरूप पहिया दक्षिणावर्त में घूमने लगता है। इस प्रकार बाल बियरिंग का उपयोग करने से बेलन घर्षण क्रियाशील होता है जिसका मान बहुत ही कम होता है।

स्नेहक का प्रयोग करके– दोनों सम्पर्क तलों के मध्य स्नेहक तेल या ग्रीस डाल देने से दोनों तल एक-दुसरे के सम्पर्क में नहीं आ पाते हैं। वास्तव में स्नेहक तेल या ग्रीस डालने से शुष्क घर्षण तरल घर्षण में परिवर्तित हो जाता है जिसका मान आपेक्षाकृत कम होता है।

बढ़ाने के उपाय

जैसा कि ऊपर बतलाया जा चुका है कि घर्षण के कारण ही हम पृथ्वी पर चल पाते हैं। घर्षण का महत्व उस समय समझ में आता है जब हम चिकने फर्श पर चलने का प्रयास करते हैं और फिसलकर गिर पड़ते हैं। जब मोटर गाड़ी का पहिया कीचड़ में फंस जाता है तो घर्षण कम होने के कारण पहिया अपने स्थान पर ही तेजी से घूमने लगता है। बाहर बिल्कुल भी नहीं निकल पाता ऐसी स्थिति में पहिए के नीचे लकड़ी का तख्ता रख देने देते हैं जिससे घर्षण का मान बढ़ जाता है और पहिया आसानी से बाहर निकल जाता है समानता घर्षण बढ़ाने के उपाय निम्नानुसार हैं:

  1. चिकनी मिटटी पर रेट डालकर घर्षण को बढ़ाया जाता है।
  2. मशीनों पर लगे पट्टे में चिपचिपा तरल पदार्थ लगते हैं।
  3. मोटर गाड़ियों के टायरों में खांचे बने होते हैं जिससे घर्षण का मान बढ़ जाता है। इस प्रकार मोटर गाड़ियों को आगे बढ़ने में सहायता मिलती है।
  4. जूते के तलवे खुरदरे बनाये जाते है जिससे चिकनी सतह पर चलने में आशानी होती है।

इस पोस्ट में आपने घर्षण (Friction) क्या है? इसके प्रक्रार, लाभ-हानि, इसको बढ़ाने और घटाने के उपाय आदि के बारे जाना। आशा करते हैं यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी।

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