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Computer in Hindi कंप्यूटर की बेसिक जानकारी

कंप्यूटर क्या है? – कंप्यूटर (Computer) सब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी भाषा के कंप्यूट (compute) सब्द से हुई है, जिसका अर्थ है गणना करना। यद्यपि प्रारंभ में कंप्यूटर का उपयोग विशेषतः गणनात्मक कार्यों के लिए किया जाता था, परन्तु अब इसका कार्य-क्षेत्र बहुत बढ़ गया है। इसे hindi में संगणक कहते है। इसका पूरा नाम है, Common Operating Machine Purposely used for Technological and Educational research – कॉमन ऑपरेटिंग मशीन पर्पसली यूज्ड फॉर टेक्नोलॉजिकल एंड एजुकेशनल रिसर्च।

अतः कंप्यूटर एक ऐसी इलेक्ट्रोनिक युक्ति (Electronic Device) है जो दिए गए निर्देशन समूह (Set of instructions) के आधार पर सूचना (Information) को संसाधित करती है। इस निर्देशन समूह को प्रोग्राम (Program) कहते हैं। इस प्रकार कंप्यूटर एक गणक ही नहीं है बल्कि यह गणितीय और अगणितीय सभी प्रकार की सूचनाओं को संशाधित करने वाला उपकरण है। जोड़, घटाना, गुणा, भाग करने वाली मशीन ही नहीं बल्कि अन्य विषयों पर विचार करने  एवं अविश्वसनीय गति से कार्य करने में समर्थ है। आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कंप्यूटर की सक्रिय भूमिका मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

कंप्यूटर और मानव मस्तिष्क (Computer and human brain)

मानव के पास मस्तिष्क होता है जिसके कारण वह स्वतंत्र रूप से सोच सकता है, गणना कर सकता है और आँख-कान जैसी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा जानकारी प्राप्त करके तर्क संगत निर्णय भी ले सकता है। वह अपने विचारों को बोल कर या लिख कर प्रकट कर सकता है।

कंप्यूटर भी कुछ इसी प्रकार से कार्य करता है। उन्हें जानकारी कुंजीपटल (keyboard) या अन्य इनपुट युक्तियों द्वारा प्राप्त होती है। वह पहले से प्राप्त डिस्को पर संचित जानकारियों का भी प्रयोग कर सकता है। किसी कार्य विशेष को करने के लिए क्रमबद्ध आदेश (प्रोग्राम) उसे कुंजीपटल (keyboard) पर टाईप करके भी दिया जा सकता है। कंप्यूटर के अन्दर लगी सीपीयू उसके मस्तिष्क की तरह कार्य करती है। वह सारी उपलब्ध जानकारी (डाटा या प्रोग्राम) के अनुसार संगणना कर देता है, या स्थायी रूप से संचित रखने के लिए प्रिंटर द्वारा कागज पर छाप देता है।

कंप्यूटर कैसे कार्य करता है? how computer works in Hindi?

कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर घटकों से बनी एक मशीन है। यह अपने आप कार्य नहीं करता इससे काम लिया जाता है। यह अपने आदेशों का पालन करता है। इसे की-बोर्ड के जरिये आदेश दिया जाता है। यह एक टाईपराईटर की तरह होता है। एक कंप्यूटर को कार्य करने के लिए दो चीजों की आवश्यकता होती है: एक तो वह सुचना अर्थात डाटा जिस पर गणना करनी है, और दूसरी वस्तु वे सूचीबद्ध आदेश है जिसके अनुरूप गणना की जानी होती है। प्रोग्राम की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि इलेक्ट्रोनिक प्रोसेसर एक निर्जीव वस्तु है जिसकी अपनी कोई बुद्धि नहीं होती।

एक कंप्यूटर एक इनपुट यूनिट के माध्यम से दिए गए निर्देशों के आधार पर डेटा प्राप्त करता है और डेटा को संसाधित करने के बाद, इसे एक आउटपुट डिवाइस के माध्यम से वापस भेजता हैजो एक मॉनिटर, स्पीकर, प्रिंटर, पोर्ट आदि हो सकता है।

कंप्यूटर का विकास (History of computer development in Hindi)

1. 1642 ईसा पूर्व में ब्लेज पास्कल (Blaise Pascal) ने विश्व का पहला यांत्रिक कैलकुलेटर (Mechanical Calculator) बनाया। इसे पास्क्लीन (Pascalene) कहा गया।

2. 1833 ईसा पूर्व में अंग्रेजी वैज्ञानिक चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) ने स्वचालित कैलकुलेटर अर्थात कम्प्यूटर ली पहली बार परिकल्पना की, पर 40 वर्ष के अथक परिश्रम के बावजूद वे इसे बना न सके। इन्हें आधुनिक कम्प्यूटर का जन्मदाता (Father of Computer) कहा जाता है। सर्वप्रथम कम्प्यूटर प्रोग्राम तैयार करने का श्रेय उनकी शिष्या लेडी एडा आगस्टा (Ada Augasta) को जाता है।

3. 1880 ईसा पूर्व में हर्मन होलोरिया ने चार्ल्स बैबेज के परिकल्पना को साकार किया। उन्होंने एक इलेक्ट्रोनिक टेबुलेटिंग मशीन बनायी, जो पंच कार्ड (Punch Card) की मदद से सारा कार्य स्वचालित रूप से करती थी। हर्मन होलोरिया द्वारा पंच कार्ड के अविष्कार ने कम्प्यूटर के विकास में बहुत योगदान दिया। यही पंच कार्ड आज भी कम्प्यूटर में प्रयोग किया जाता है।

4. 1937 में होवार्ड ऐकिन ने पहला यांत्रिक कम्प्यूटर (Mechanical Computer) मार्क-1 बनाया।

5. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान (1939-45) कम्प्यूटर विज्ञान में तेजी से विकास हुआ। द्वितीय विश्व युद्धके उपरांत आधुनिक कम्प्यूटर के सभी प्रमुख सिद्धांतों का विकास हुआ।

6. 1946 में J. Presper Eckert और John Mauchly ने विश्व के पहले इलेक्ट्रोनिक ENIAC-1 (Electronic Numerical Integrator and Calculator) अविष्कार किया। इसमें स्विच के रूप में इलेक्ट्रोनिक वाल्ब या वैक्यूम ट्यूब (Electronic Valve or Vacuum Tube) का उपयोग किया गया था।

7. कम्प्यूटर के विकास में सबसे ज्यादा योगदान जान वान न्यूमैन का है। जान वान न्यूमैन ने 1951में कम्प्यूटर क्रांति को सही दिशा दी। उन्होंने EDVAC (Electronic Discrete Variable Automatic Computer) का अविष्कार किया। इसमें उन्होंने संचयित प्रोग्राम (Stored Program) का इस्तेमाल किया। कम्प्यूटर के कार्य के लिए द्विआधारी पद्धति (Binary System) के प्रयोग का श्रेय भी उन्ही को जाता है।

जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (Generation of computer 1st to 5th in Hindi)

कंप्यूटर का विकास 5 विभिन्न चरणों में हुआ है जिसके आधार पर कंप्यूटर तकनिकी को 5 पीढ़ियों में विभाजित किया गया है। इन पांच पीढियों के कंप्यूटर में अंतर उनके स्विचन अवयव के आधार पर किया गया है –

प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर (first generation of computer)

1940 – 1956: First Generation – Vacuum Tubes

इस युग के कंप्यूटर का नाम ‘युनीवासी’ था इसका प्रयोग पहली बार अमेरिका में किया गया था। इसी काल में vaccum tube का प्रयोग शुरू हुआ था। ट्यूबों पर आधारित मार्क-1 नामक कंप्यूटर का विकाश इसी पीढ़ी के अंतर्गत हुआ था। इस समय के कंप्यूटर काफी आधुनिक होते हुए भी खर्चीले, आकार में बड़े और अत्याधिक उष्मा छोड़ने वाले वाले थे।

1952 में पेसिलवानिया विश्वविध्यालय के प्रधानाध्यापक डा. ग्रेस हापर ने असेंबली भाषा का अविष्कार किया और और इसका प्रयोग प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में हुआ। इसी पीढ़ी में ‘चुम्बकीय ड्रम’ उपकरण का प्रयोग आंतरिक मेमोरी के लिए होता था। इस पीढ़ी के कंप्यूटर की भाषा अश्तित्व में आ चुकी थी। पहली भाषा Machine Language- 0101100011000001001001 प्रकार की थी।

द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर (second generation of computer)

1956 – 1963: Second Generation – Transistors

इस काल के कंप्यूटर में इलेक्ट्रानिक के क्षेत्र में ट्रांजिस्टर ने क्रांति का काम किया। vaccum tube की जगह ट्रांजिस्टर ने ले ली जिससे कंप्यूटर काफी हल्का और छोटा हो गया। इसमें विद्युत का प्रयोग कम मात्रा में होता था। Punch Card की जगह Tape तथा Disk का प्रयोग शुरू हुआ जिससे कंप्यूटर की गति काफी तीव्र हो गयी। Disk प्रयोग में आने के कारण इस पीढ़ी के कंप्यूटर आंकड़ों तथा निर्देशों को अधिक मात्रा में संग्रहित करने में सक्षम हो गये।

इस पीढ़ी में आकर ड्रम मेगनेटिक कोर इंटरनल मेमोरी में बदल गया। अब Machine Language का स्थान High Level Language ने लिया जिससे कंप्यूटर का संचालन अंग्रेजी भाषा में होने लगा। COBOL (comon business oriented) यह सामान्यतः व्यापारिक भाषा बनी तथा FORTAN (Formula Translation) इसका विकाश IBM द्वारा किया गया था जिसका सर्वाधिक प्रयोग वैज्ञानिक कार्यों के लिए किया गया।

तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर (third generation of computer)

1964 – 1971: Third Generation – Integrated Circuits

IBM के महत्वपूर्ण सहयोग से Integrated Circuit (IC) से लैस कंप्यूटर की एक नयी श्रंखला प्रस्तुत की गयी। इसका प्रयोग कार्यालयों में शुरू हुआ। यह सबसे युगांतकारी प्रयोग साबित हुआ। इस श्रंखला के प्रमुख कंप्यूटर थे- 360/मॉडल 195, सिस्टम/360 तथा 360/मॉडल 10 आदि। I.C. के प्रयोग से कंप्यूटर छोटा हो गया। इसका रख-रखाव सहज हो गया इस पीढ़ी में BASIC (Beginners’ All-purpose Symbolic Instruction Code) नामक High Level Language का विकाश हुआ।

इसी काल में RGP ( Report Program generator) नामक संकल्पना प्रचलन में आया, इसका सबसे बड़ा लाभ यह मिला कि मनचाही रिपोर्ट का Layout कंप्यूटर में freed करते थे तथा कंप्यूटर स्वमं ही Program लिख देता था। POP-8 नामक mini computer इसी समय बाजार में उतरा गया। वह एक फ्रिज की तरह होता था। इसे DEC- Digital Equipment Corporation कंपनी ने तैयार किया था। बाद में दूसरी अमेरिकी कंपनी डाटा जनरल ने काफी काम कीमत में ही मिनी कंप्यूटर को बाजार में उतरा। इसका प्रचलन काफी तेजी हुआ। इसी पीढ़ी तक कंप्यूटर से सामान्यतः लोग भी परिचित होने लगे।

चतुर्थ पीढ़ी के कंप्यूटर (Fourth Generation of Computer)

1972 – 2010: Fourth Generation – Microprocessors

इस पीढ़ी को माइक्रो प्रोसेसर युग के रूप में भी जाना जाता है। इसी काल में VLSI (Very Large Scale Integration) एवं ULSI (Ultra large-scale integration) का उपयोग शुरू हुआ और इसी वजह से कंप्यूटर काफी छोटा हो गया। इसी काल ने इंटेल कारपोरेशन, माइक्रोसाफ्ट कारपोरेशन, एप्पल, आईबीए और लोटस को जन्म दिया। बिल गेट्स और मैरीन ई. टेड हैफ भी इसी काल की देन है।

1970 एक अन्य अमेरिकी कंपनी MITS (Micro Instrumenta and Team entry Syster) द्वारा Altair 8800 के नाम से माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित कंप्यूटर बाजार में लाया गया। अपने काम को और अधिक उपयोग में लाने के लिए MITS ने बिलगेट्स नामक एक सोफ्टवेयर इन्जीनियर को ‘बेसिक’ नाम की उच्च स्तरीय कंप्यूटर की भाषा के निर्माण का कार्य सौंपा जिसमें बिलगेट्स सफल रहे। बाद में बिलगेट्स ने स्वमं ‘माइक्रोसाफ्ट कारपोरेशन’ नाम की कंपनी स्थापित की। आज बिलगेट्स दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति माने जाते हैं।

इसी काल के मध्य में स्टीव जॉव और जोनेक नामक दो युवा ‘एप्पल कंप्यूटर’ के नाम से माइक्रोप्रोसेसर युक्त कंप्यूटर किट को बाजार में आये। इससे एप्पल काफी आगे बढ़ा। बाद में Visi Cale नामक एक कैलकुलेटर सॉफ्टवेयर को प्रस्तुत किया। 1981 में आईबीएम ने माइक्रो कंप्यूटर के क्षेत्र में पहला क़दम रखा जिसे उसने आईबीएम (पीसी) नाम दिया। इससे एप्पल माइक्रो कंप्यूटर से काफी पीछे चला गया। बाद में ‘लोटस डेवलपमेंट कारपोरेशन’ द्वारा लोटस 1-2-3 नामक एक Spread Sheet साफ्टवेयर को बाजार में प्रस्तुत किया गया। यह सोफ्टवेयर एप्पल के Visi Cale के काफी शक्तिशाली था।

आईबीएम और लोटस

बाद में आईबीएम और लोटस ने एक व्यापारिक समझौते अपने-अपने उत्पादों की कीमत काफी कम कर दी। इसके परिणाम स्वरूप लगभग 75% कंप्यूटर बाजार में आईबीएम का कब्ज़ा हो गया। इसी पीढ़ी में एमओएस (MOS: Metal Oxside Semiconductor) मेमोरी का प्रयोग शुरू हुआ। यह छोटा, तेजी से काम करने वाला तथा शक्तिशाली था। साथ ही इसकी सहायता से मेमोरी को घटाने और बढ़ाने में भी सुविधा हुई। इसी काल में C एवं Pascal भाषा आई तथा बेसिक, फोरट्रान, कोबोल, आईपीजी आदि में परिमार्जन हुआ। इसके अतिरिक्त पैकेज सोफ्टवेयर का प्रचलन शुरू हुआ।

पांचवी पीढ़ी या वर्तमान पीढ़ी (Fifth generation of computer)

2010- : Fifth Generation – Artificial Intelligence

वर्तमान पीढ़ी को पांचवी पीढ़ी के नाम से जाना जाता है। इस पीढ़ी में कंप्यूटर काफी छोटा और अति उपयोगी हो गया है। आईबीएम ने इस पीढ़ी में 80286-386-586 (पेंटियम) बाजार में उपलब्ध करा चुकी है। आज सुपर कंप्यूटर और रोबोट भी बाजार में आ चुके हैं। कृत्रिम ज्ञान क्षमता वाले तथा नए-नए Application software भी बाजार में आ चुके हैं। साथ ही Operating system में भी काफी विकाश हुआ है। सीडी के माध्यम से कंप्यूटर मनोरंजन के लिए भी बेहतर साबित हुआ है। आज कंप्यूटर की मेमोरी (RAM) को अपनी इच्छानुसार घटाया बढ़ाया जा सकता है।

कंप्यूटर के प्रकार (Types of Computer in Hindi)

तकनीकी रूप से हम कंप्यूटरों को दो प्रकार से बाँट सकते हैं पहले तरह के कंप्यूटर को एनालॉग कहा जाता है और दूसरे तरह के कंप्यूटर को डिजिटल कहा जाता है। वर्तमान समय में एनालॉग कंप्यूटर का विकाश लगभग बंद हो गया है और अब डिजिटल कंप्यूटर ही चलन में है। डिजिटल कंप्यूटर सीओ हम आसानी से समझने के लिए चार भागों में बाँट सकते हैं-

  1. माइक्रो कंप्यूटर (Micro computer)
  2. मिनी कंप्यूटर (Mini computer)
  3. मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe computer)
  4. सुपर कंप्यूटर (Super computer)

1. माइक्रो कंप्यूटर (Micro computer)

इस कंप्यूटर का विकाश सन 1970 में हो गया था। इनमें माइक्रो प्रोसेसर लगे होने के कारण इन्हें माइक्रो कंप्यूटर कहा गया। इस तकनीकी वाले कंप्यूटर आकार में छोटे, कीमत में सस्ते तथा क्षमता में बेहतर होते हैं। हम जो पर्सनल कंप्यूटर प्रयोग करते हैं वह माइक्रो कंप्यूटर की ही श्रेणी में आते हैंमाइक्रो कंप्यूटर में सबसे पहला सफल कंप्यूटर पीसी एक्सटी था। जिसमे 8088 माइक्रो प्रोसेसर का प्रयोग किया गया था। इसमें 64 किलोबाइट रैम अर्थात प्राइमरी मेमोरी और 10 मेगाबाइट वाली हार्डडिस्क का प्रयोग किया जा सकता था बाद में इसकी मेमोरी प्रयोग करने की क्षमता 1 मेगाबाइट हो गयी। इस कंप्यूटर में फ्लॉपी डिस्क का भी प्रयोग किया गया है जिसकी स्टोरेज क्षमता 180-360 किलोबाइट तक थी।

2. मिनी कंप्यूटर (Mini computer)

यह मेनफ्रेम कंप्यूटरों से बड़े तथा पर्सनल कंप्यूटर से छोटे होते हैं। इनका प्रयोग बड़ी-बड़ी कंपनिया करती हैं और इन्हें विश्वसनीय माना जाता है। कीमत में यह माइक्रो कंप्यूटर से बड़े होते हैं। इसलिए इनका व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल संभव नहीं है।

3. मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe computer)

इनकी प्रोसेसिंग शक्ति मिनी कंप्यूटरों से बहुत ज्यादा होती है और इनका वैज्ञानिक कार्यो में बड़ी व्यापारिक कम्पनियों द्वारा डेटा प्रोसेसिंग के सन्दर्भ में प्रयोग किये जाते हैं। इस कंप्यूटर पर एक साथ बहुत से व्यक्ति अलग-अलग कार्य कर सकते हैं।

4. सुपर कंप्यूटर (Super computer)

सुपर कंप्यूटर अभी तक बनाये गए कंप्यूटरों से सबसे ज्यादा शक्तिशाली है और इसका प्रयोग हमारे देश में मौसम विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान में होता है। इस कंप्यूटर पर डाटा प्रोसेसिंग की क्षमता इतनी तेज होती है कि यह एक सेकेण्ड में खरबों गणनाएं कर लेता है। आज हमारा देश भी सुपर कंप्यूटर बनाने वाले देशों की श्रेणी में आता है।

कम्प्यूटर की इकाई (Units of computer system in Hindi)

कम्प्यूटर की मुक्य चार इकाईयां होती है –

  • Input Unit – निवेश इकाई – इनपुट डिवाइस कंप्यूटर में  सूचना  (Data) और नियंत्रण संकेत प्रदान करने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण का एक टुकड़ा है। इनपुट डिवाइस के उदाहरणों में कीबोर्ड, माउस, स्कैनर, कैमरा, जॉयस्टिक और माइक्रोफोन शामिल हैं।
  • Central Processing Unit – केन्द्रीय संसाधन इकाई – केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (C.P.U.) एक कंप्यूटर के भीतर इलेक्ट्रॉनिक सर्किटरी होता है जो Input Unit द्वारा निर्दिष्ट किये गये Data को संचालन करता है जिसे Output Device के द्वारा देखा जाता है।
  • External Memory Unit – बाह्य स्मृति कार्ड – यह एक बाहरी स्टोरेज डिवाइस है, जिसे सहायक स्टोरेज और सेकेंडरी स्टोरेज के रूप में भी जाना जाता है, एक ऐसा उपकरण है जिसमें सभी Addressable data स्टोरेज होते हैं जो कंप्यूटर के मुख्य स्टोरेज या मेमोरी के अंदर नहीं होते हैं। यह बिना सिस्टम खोले स्टोरेज क्षमता बढ़ाता है।
  • Output Unit – निर्गमन इकाई – एक आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर हार्डवेयर उपकरण का कोई भी टुकड़ा है जो सूचना को मानव देखने या पढने के रूप में परिवर्तित करता है। यह टेक्स्ट, ग्राफिक्स, टैक्टाइल, ऑडियो हो सकता है।

डेटा कम्प्यूटर में इनपुट इकाई के द्वारा प्रविष्ट किया जाता है,  सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट द्वारा आवश्यकतानुसार एक्सटर्नल मेमोरी यूनिट के सहयोग से डेटा को व्यवस्थित तथा संसाधित किया जाता है और अंत में ‘आउटपुट यूनिट’ के द्वारा उन्हें डेटा या इनफार्मेशन के रूप में निर्गमित किया जाता है। CPU को कम्प्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है। CPU को माइक्रो प्रोसेसर (Micro Processor) भी कहा जाता है।

कम्प्यूटर के कार्य  (Computer Functions in Hindi)

कम्प्यूटर के प्रमुख तकनीकी कार्य चार प्रकार के होते हैं –

  1. आकड़ों का संकलन तथा निवेशन (collection and input)
  2. आंकड़ों का संचयन (Storage)
  3. आंकड़ों का संचालन (Processing)
  4. आंकड़ो या प्राप्त जानकारी का निर्गमन या पुनर्गमन (Output or Retrieval)

ये आंकड़े या जानकारी लिखित, मुद्रित, श्राव्य, द्रश्य, आरेखित, या यांत्रिक चेष्टाओं के रूप में हो सकते हैं।

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FAQ

कंप्यूटर क्या है हिंदी में परिभाषा?

कंप्यूटर (Computer) सब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी भाषा के कंप्यूट (compute) सब्द से हुई है, जिसका अर्थ है गणना करना। इसे hindi में संगणक कहते है।

कंप्यूटर का पूरा नाम क्या है?

COMPUTER (कंप्यूटर): Common Operating Machine Purposely used for Technological and Educational research (कॉमन ऑपरेटिंग मशीन पर्पसली यूज्ड फॉर टेक्नोलॉजिकल एंड एजुकेशनल रिसर्च)

कंप्यूटर का क्या काम है?

आकड़ों का संकलन तथा निवेशन (collection and input)
आंकड़ों का संचयन (Storage)
आंकड़ों का संचालन (Processing)
आंकड़ो या प्राप्त जानकारी का निर्गमन या पुनर्गमन (Output or Retrieval)

इस पोस्ट में आपने कंप्यूटर क्या है? कम्प्यूटर का विकास, Generation of computer 1st to 5th in Hindi, कंप्यूटरर की इकाई (Units of Computer) और कंप्यूटर के कार्य के बारे में जाना। आपको यह जानकारी कैसी लगी नीचे comment करके जारूर बताएं।

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