My Education

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व हिंदी निबंध

अनुशासन का महत्व पर निबंध

प्रस्तावना – अनुशासन शब्द अनु + शासन के योग से बना है। शासन का अर्थ है नियम आज्ञा तथा अनु का अर्थ है पीछे चलना, पालन करना। इस प्रकार अनुशासन का अर्थ शासन का अनुसरण करना है। किन्तु इसे परतन्त्रता मान लेना नितान्त अनुचित है। विकास के लिए तो नियमों का पालन आवश्यक है। युवक की सुख शान्तिमय प्रगतिशीलता का संसार छात्रावस्था पर अवलम्बित है। अनुशासन आत्मानुशासन का ही एक अंग है।

अनुशासन की आवश्यकता

जीवन की सफलता का मूलाधार अनुशासन है। समस्त प्रकृति अनुशासन में बंधकर गतिवान रहती है। सूर्य, चन्द्रमा, नक्षत्र, सागर, नदी, झरने, गर्मी, सत् वर्षा एवं वनस्पतियाँ आदि सभी अनुशासित है।

अनुशासन सरकार, समाज तथा व्यक्ति तीन स्तरों पर होता है। सरकार के नियमों का पालन करने के लिए पुलिस, न्याय, दण्ड, पुरस्कार आदि की व्यवस्था रहती है। ये सभी शासकीय नियमों में बंधकर कार्य करते हैं। सभी बुद्धिमान व्यक्ति उन नियमों पर चलते हैं तथा जो उन नियमों का पालन नहीं करते हैं, वे दण्ड के भागी होते हैं।

सामाजिक व्यवस्था हेतु धर्म, समाज आदि द्वारा बनाये गये नियमों का पालन करने वाले व्यक्ति सभ्य, सुशील तथा विनम्र होते हैं। जो लोग अनुशासनहीन होते हैं, वे असभ्य एवं उद्दण्ड की संज्ञा से अभिहित किये जाते हैं तथा दण्ड के भागी होते हैं। अनुशासन न मानने वाले व्यक्ति को समाज में हीन तथा बुरा माना जाता है। व्यक्ति स्वयं अनुशासित रहे तो उसका जीवन स्वस्थ, स्वच्छ तथा सामर्थ्यवान बनता है। वह स्वयं तो प्रसन्न रहता है, दूसरों को भी अपने अनुशासित होने के कारण प्रसन्न रखता है।

ऋषि-महर्षि अध्ययन के बाद अपने शिष्यों को विदा करते समय अनुशासित रहने पर बल देते थे। वे जानते थे कि अनुशासित व्यक्ति ही किसी उत्तरदायित्व को वहन कर सकता है। अनुशासित जीवन व्यतीत करना वस्तुतः दूसरे के अनुभवों से लाभ उठाना है। समाज ने जो नियम बनाये हैं वे वर्षों के अनुभव के बाद सुनिश्चित किये गये हैं। भारतीय मुनियों ने अनुशासन को अपरिहार्य माना, ताकि व्यक्ति का समुचित विकास हो सके। आदेश देने वाला व्यक्ति प्रायः आज्ञा दिये गये व्यक्ति का हित चाहता है। अतएव अनुशासन में रहना तथा अनुशासन को अपने आचरण में ढाल लेना आवश्यक है।

अनुशासन के लाभ

अनुशासन के असीमित लाभ हैं। प्रत्येक स्तर की व्यवस्था के लिए अनुशासन आवश्यक है। राणा प्रताप, शिवाजी, सुभाषचन्द्र बोस, महात्मा गाँधी आदि ने इसी के बल पर सफलता प्राप्त की। इसके बिना बहुत हानि होती है। सन् 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़े गये स्वतन्त्रता संग्राम की असफलता का कारण अनुशासनहीनता थी। 31 मई को सम्पूर्ण उत्तर भारत में विद्रोह करने का निश्चय था, लेकिन मेरठ की सेनाओं ने 10 मई को ही विद्रोह कर दिया, जिससे अनुशासन भंग हो गया। इसका परिणाम सारे देश को भोगना पड़ा। सब जगह एक साथ विद्रोह न होने के कारण फिरंगियों ने विद्रोह को कुचल दिया।

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने शान्तिपूर्वक विशाल अंग्रेजी साम्राज्यवाद की नींव हिला दी। थी। उसका एकमात्र कारण अनुशासन की भावना थी। महात्मा गांधी की आवाज पर सम्पूर्ण देश सत्यामह के लिए चल देता था। अनेकानेक कष्टों को भोगते हुए भी देशवासियों ने सत्य और

अहिंसा का मार्ग नहीं छोड़ा। पहली बार जब कुछ सत्याग्रहियों ने पुलिस के साथ मारपीट तथा दंगा कर डाला तो महात्माजी ने तुरन्त सत्याग्रह बन्द करने की आज्ञा देते हुए कहा कि ” अभी देश सत्याग्रह के योग्य नहीं है। लोगों में अनुशासन की कमी है।” उन्होंने तब तक पुनः सत्याग्रह प्रारम्भ नहीं किया, जब तक उन्हें लोगों के अनुशासन के बारे में विश्वास नहीं हो गया। अतएव अनुशासन द्वारा लोगों में विश्वास की भावना पैदा की जाती है। अनुशासन विश्वास का एक महामन्त्र है।

सेना की सफलता का आधार अनुशासन होता है। सेना और भीड़ में अन्तर ही यह है कि भीड़ में कोई अनुशासन नहीं होता, जबकि सेना अनुशासित होती है। नेपोलियन, समुद्रगुप्त तथा सिकन्दर आदि महान् कहे जाने वाले सेनानायकों ने जो विजय पर विजय प्राप्त कीं, उनके मूल में उनकी सेनाओं का अनुशासित होना ही था।

यातायात, अध्ययन, वार्तालाप आदि में भी अनुशासन आवश्यक है। रेल ड्राइवर सिगनल होने पर ही गाड़ी आगे बढ़ाता है। अनुशासन के द्वारा ही एक अध्यापक पचास-साठ छात्रों की कक्षा को अकेले पढ़ाता है। राष्ट्रपति से लेकर निम्नतम कर्मचारी तक सारी शासन-व्यवस्था अनुशासन से ही संचालित रहती है। शरीर में किंचित अव्यवस्था होते ही रोग लग जाता है।

छात्रानुशासन

अनुशासन विद्यार्थी जीवन का तो अपरिहार्य अंग है। चूँकि विद्यार्थी देश के भावी कर्णधार होते हैं, देश का भविष्य उन्हीं पर अवलम्बित होता है। उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे स्वयं अनुशासित, नियन्त्रित तथा कर्तव्यपरायण होकर देश की जनता का मार्गदर्शन करें, उसे अन्धकार के गर्त से निकालकर प्रकाश की ओर ले जायें। अतः उनके लिए अनुशासित होना आवश्यक है।

अनुशासन के सन्दर्भ में मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन प्रेरणादायी है। अनुशासन में रहने के कारण ही राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाने के अधिकारी हुए। अनुशासन के अधीन वे राजतिलक त्यागकर वनवासी बन जाते हैं तथा अपनी पत्नी का परित्याग कर प्रजा की आज्ञा का पालन करते हैं। इस सबका कारण है—उनका अनुशासित जीवन ।

उपसंहार

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि जीवन में महान् बनने के लिए अनुशासन आवश्यक है। बिना अनुशासन के कुछ भी कर पाना असम्भव है। अनुशासन से व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है तथा समाज को शुभ दिशा मिलती है। वस्तुतः अनुशासित जीवन ही जीवन है। अनुशासित जीवन के अभाव में हमारी जिन्दगी दिशाहीन एवं निरर्थक हो जायेगी।

Also Read

Doordarshan – दूरदर्शन पर निबंध, आविष्कार, इतिहास तथा टिप्पणी

Doordarshan history in hindi

दूरदर्शन

दूरदर्शन विज्ञान का एक अनुपम उपहार है। इसने मानव जीवन में एक हलचल पैदा कर दी है और समाज को थोड़े ही समय में तीव्र गति से विकास की ओर अग्रसर किया है।

दूरदर्शन (Doordarshan) क्या है? इसका शुभारम्भ कब हुआ दूरदर्शन का अविष्कार किसने किया था? तथा इसकी देन, लाभ, निबंध आदि पर विशेष टिप्पणी विस्तार से जाने।

प्रस्तावना – दिवस के अवसान और सन्ध्या के समय सुबह से शाम तक थका हुआ मानव शारीरिक विश्राम के साथ मानसिक आराम भी चाहता है जिससे उसकी थकान मिट जाये और मन पुलकित हो उठे। इसके लिए वह जो भी उपाय अपनाता है उसे कहते हैं मनोरंजन मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ मनोरंजन के साधनों में भी परिवर्तन हुए हैं। पहले कुछ दृश्य साधन थे, कुछ श्रव्य। या तो वह तस्वीरें देखता था या रेडियो, टेप सुनता। घर बैठे या लेटे-लेटे -यदि मनोरंजन हो तो क्या बात है ? प्राचीनकाल में धृतराष्ट्र अपने महल में बैठे-बैठे जैसे संजय द्वारा कुरुक्षेत्र के मैदान का आँखों देखा हाल सुनते थे वैसे ही दूरदर्शन के आविष्कार से हमें भी यह दृश्य-श्रव्य उपकरण लाभ पहुँचाता है।

विज्ञान की अपूर्व देन

दूरदर्शन विज्ञान का एक अनुपम उपहार है। इसने मानव जीवन में एक हलचल पैदा कर दी है और समाज को थोड़े ही समय में तीव्र गति से विकास की ओर अग्रसर किया है। संसार सिमटकर छोटा हो गया है। अब हम विश्वभर की घटनाएँ अपने कमरे में देख सकते हैं, सुन सकते हैं।

दूरदर्शन का आविष्कार

दूरदर्शन का आविष्कार सर्वप्रथम जॉन लागी बेअर्ड महोदय ने 1926 में किया था। ये स्कॉटलैण्ड के रहने वाले थे। इन्होंने ठेली कैमरे का आविष्कार किया तथा इसका सफल प्रदर्शन कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। यह फोटो इलेक्ट्रिक सेल की सहायता से कार्य करता है। रेडियो तरंगों की भाँति ही प्रकाश को विद्युत तरंगों में रूपान्तरित कर दूर तक प्रसारित किया जाता है और रिसीविंग सेट उसे ग्रहण करके प्रकाश में चित्रों को परिवर्तित। कर स्क्रीन या परदे पर उतार देता है। पहले ये दृश्य काले, सफेद हुआ करते थे। अब ये रंगीन दृश्य संसार में कहीं भी देखे जा सकते हैं। जीवन्त प्रसारण में तत्कालीन दृश्य ज्यों के त्यों प्रसारित किये जाते हैं।

भारतवर्ष में दूरदर्शन का प्रथम शुभारम्भ

हमारे देश में दूरदर्शन का प्रथम प्रसारण 1958 मे दिल्ली में हुआ। उस समय दिल्ली में औद्योगिक एवं विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। उस समय भारतीयों के लिए यह एक कौतुक भरी घटना थी। धीरे-धीरे इसका प्रचार-प्रसार होता गया। बाद में 1972 में मुम्बई में, 1973 में कश्मीर में दूरदर्शन केन्द्रों की स्थापना हुई। मध्य देश में 1978 में छत्तीसगढ़ जिले में दरदर्शन आया तथा उप द्वारा कार्यक्रमों का प्रसारण हुआ। उन दिनों अधिकांश कार्यक्रम शैक्षिक और ग्रामीण जीवन पर आधारित होते थे।

दूरदर्शन से लाभ

दूरदर्शन के अनेक लाभ है, मुख्यतः इसके कुछ उद्देश्य स्पष्ट है। सर्वप्रथम यह मनोरंजन का प्रमुख साधन है। इससे हमें ध्वनि, प्रकाश और फोटोमाफी का चमत्कार देखने को मिलता है। दूरदर्शन को निरन्तर हुई लोकप्रियता का कारण यह है कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग आयु और व्यवसाय के अनुरूप अनेक कार्यक्रमों का प्रसारण होता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी रुचि और आवश्यकता होती है और दूरदर्शन ही एक ऐसा साधन जो प्रातः से अर्द्धरात्रि तक अपने कार्यक्रमों के माध्यम से सभी की जरूरतें पूरी करता है। बच्चों किशोर, औढ़, बुजुर्ग और महिलाओं के लिए अलग-अलग कार्यक्रम है। इसी प्रकार भिन्न एवं रुचि वाले लोगों की भी मनोरंजन-तृप्ति दूरदर्शन से ही होती है।

विभिन्न वर्गों के लिए लाभप्रद

बच्चों के लिए कार्टून फिल्में, किशोरों के लिए प्रश्न- मंच आदि कार्यक्रम छात्रों के लिए यू.जी.सी. तथा इन्दिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के शैक्षिक कार्यक्रम, विज्ञान, इतिहास, राजनीति से सम्बन्धित कार्यक्रम। देश-विदेश में खेले जा रहे अनेक प्रकार को खेल प्रतियोगिताओं का जीवन्त प्रसारण। गीत, नृत्य या फिल्मी संगीत में रुचि रखने वालों के लिए कार्यक्रम। साहित्यिक रुचि वालों के लिए मुशायरा, कवि सम्मेलन, साहित्यकारों का परिचय परिचर्चा का प्रसारण महिलाओं की प्रगति एवं जागृति के अनेक कार्यक्रम प्रामीण से लेकर शहरी महिलाओं के लिए अनेकानेक प्रकार के हस्तशिल्प उद्योग-धन्धों की जानकारी। भोजन या विविध व्यंजनों को बनाने की विधियों पर आधारित कई कार्यक्रम, घरेलू दवाओं, नुस्खों का ज्ञान। बुजुर्गों के लिए धार्मिक सन्त महात्माओं के प्रवचन। आप घर बैठे सत्संग का लाभ उठा सकते हैं।

राजनीति में रुचि रखने वालों के लिए वो दूरदर्शन जीवन का एक आवश्यक अंग बन गया है। देश-विदेश की खबरें, चुनाव चर्चा, सभी पार्टियों का आंकलन क्रिया-कलाप और समस्त राजनैतिक व्यक्तियों की समग्र जानकारी हमें दूरदर्शन से प्राप्त होती है। कहा जाता है कि केवल सुनकर बात हृदयंगम नहीं होती। यदि वह दिखायी दे तो सहजता से होती है। अतः छात्रों को यदि दूरदर्शन के माध्यम से शिक्षा दी जाय तो अधिक लाभ होगा। शासन यदि अधिक से अधिक शैक्षिक कार्यक्रमों का प्रसारण करे। विभिन्न प्रकार की मौसम सम्बन्धी जानकारी हमें प्राप्त होती है। आंधी तूफान वर्षा भूकम्प आदि से सम्बन्धित पूर्व सूचनाएँ हमें दूरदर्शन से मिलती हैं।

मनोरंजन का सुलभ साधन

यह मनोरंजन का सबसे सस्ता एवं सुविधाजनक उपकरण है। अफगान अमेरिका का युद्ध हो या जापान की जीवन झाँकी, ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट मैच हो मा ओलम्पिक, देश में गणतन्त्र दिवस की परेड हो या चुनाव की हलचल सभी कुछ दूरदर्शन पर देखना मुलभ है। दूरदर्शन में विज्ञापनों के माध्यम से हमें अनेकानेक नवीन उपकरणों और वस्तुओं के आविष्कार की जानकारी मिलती है। यह विज्ञान का सशक्त जरिया है। इससे व्यापार | बढ़ाने के अवसर मिलते हैं।

भावात्मक एकता का पोषक

दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों से सामाजिक सुधार को दिशा मिलती है। सभी धर्मों के त्यौहारों का सजीव दृश्य हम दूरदर्शन के माध्यम से देखकर जानकारी प्राप्त करते हैं, इससे भावनात्मक एकता सुदृढ़ होती है। कई कार्यक्रम तो इतने लोकप्रिय हुए कि सभी धर्म, जाति तथा उम्र के लोग उसे बड़े चाव से देखते थे, जैसे-रामायण, श्रीकृष्ण, महाभारत, टीपू सुल्तान आदि। इनके प्रसारण के समय शहर सुनसान हो जाता था। आज का किशोर दूरदर्शन के कार्यक्रमों को देखने में व्यस्त हो जाता है तो समाज में अपराध और लड़ाई-झगड़े कम होते हैं। किसी वस्तु को हम पूरी तरह से अच्छा या बुरा नहीं कह सकते। हम उसका उपयोग किस प्रकार करते हैं उस पर उसकी महत्ता निर्भर करती है। दूरदर्शन से जहाँ अनेक लाभ हैं वहाँ कुछ हानि भी हैं। किन्तु यदि छात्र यह बात ध्यान में रखें कि ‘अति सर्वत्र वर्जयेत्’ । यानि हर समय दूरदर्शन के सामने न बैठे रहें, उससे आँखों पर तो बुरा प्रभाव पड़ता है, साथ ही समय भी नष्ट होता है और अनेक जरूरी काम रह जाते हैं। इसलिए वे अपनी रुचि और उपयोगिता के अनुसार कुछ कार्यक्रम पसन्द कर लें और केवल उन्हीं को देखें। विज्ञान तथा सामान्य ज्ञान के प्रश्न मंच तथा परिचर्चा देखें। शैक्षिक प्रसारण से लाभ लें।

उपसंहार – यदि दूरदर्शन पर स्वस्थ, शालीन कार्यक्रमों का प्रसारण हो तो ऐसे उपयोगी ज्ञानवर्द्धक सूचनाओं से गुणात्मक विकास होगा। विवेक और संयम से तथा अभिभावकों की अनुमति तथा सलाह से यदि छात्र दूरदर्शन का उपयोग करेंगे तो वह उनकी जीवन की प्रगति में सहायक होगा।

FAQs

दूरदर्शन का पहला प्रसारण कब हुआ?

हमारे देश में दूरदर्शन का प्रथम प्रसारण 1958 मे दिल्ली में हुआ। उस समय दिल्ली में औद्योगिक एवं विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

दूरदर्शन का संस्थापक कौन है?

दूरदर्शन का आविष्कार सर्वप्रथम जॉन लागी बेअर्ड महोदय ने 1926 में किया था। ये स्कॉटलैण्ड के रहने वाले थे।

Also readपर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

Pradushan par nibandh पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

प्रदूषण के कारण और निदान परीक्षा से सम्बन्धित पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में। Pradushan par nibandh. Essay writing on environmental pollution.

प्रदूषण : कारण और निदान

प्रदूषण : कारण और निदान

प्रदूषण पर्यावरण में फैलकर उसे प्रदूषित बनाता है और इसका प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर उल्टा पड़ता है। इसलिए हमारे आस-पास की बाहरी परिस्थितियाँ जिनमें वायु, जल, भोजन और सामाजिक परिस्थितियाँ आती हैं; वे हमारे ऊपर अपना प्रभाव डालती हैं।

प्रस्तावना– प्रदूषण का अर्थ- प्रदूषण पर्यावरण में फैलकर उसे प्रदूषित बनाता है और इसका प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर उल्टा पड़ता है। इसलिए हमारे आस-पास की बाहरी परिस्थितियाँ जिनमें वायु, जल, भोजन और सामाजिक परिस्थितियाँ आती हैं; वे हमारे ऊपर अपना प्रभाव डालती हैं। प्रदूषण एक अवांछनीय परिवर्तन है; जो वायु, जल, भोजन, स्थल के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों पर विरोधी प्रभाव डालकर उनको मनुष्य व अन्य प्राणियों के लिए हानिकारक एवं अनुपयोगी बना डालता है। कहने का तात्पर्य यह है कि जीवधारियों के 1. समग्र विकास के लिए और जीवनक्रम को व्यवस्थित करने के लिए वातावरण को शुद्ध बनाये रखना परम आवश्यक है। इस शुद्ध और सन्तुलित वातावरण में उपर्युक्त घटकों की मात्रा निश्चित होनी चाहिए। अगर यह जल, वायु, भोजनादि तथा सामाजिक परिस्थितियाँ अपने असन्तुलित रूप में होती है; अपना उनको मात्रा कम या अधिक हो जाती है, तो वातावरण प्रदूषित हो जाता है तथा जीवधारियों के लिए किसी न किसी रूप में हानिकारक होता है। इसे ही प्रदूषण करते हैं।

प्रदूषण के विभिन्न प्रकार

प्रदूषण निम्नलिखित रूप में अपना प्रभाव दिखाते है

(1) वायु प्रदूषण

वायुमण्डल में गैस एक निश्चित अनुपात में मिश्रित होती है और जीवधारी अपनी क्रियाओं तथा साँस के द्वारा ऑक्सीजन और कार्बन डाइ ऑक्साइड का सन्तुलन बनाये रखते हैं। परन्तु आज मनुष्य अज्ञानवश आवश्यकता के नाम पर इन सभी गैसों के सन्तुलन को नष्ट कर रहा है। आवश्यकता दिखाकर वह वनों को काटता है जिससे वातावरण में ऑक्सीजन कम होती है, मिलों की चिमनियों के धुएं से निकलने वाली कार्बन डाइ ऑक्साइड, क्लोराइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि भिन्न-भिन्न गैसे वातावरण में बढ़ जाती हैं। के विभिन्न प्रकार के प्रभाव मानव शरीर पर ही नहीं-वस्त्र, धातुओं तथा इमारतों तक पर डालती है।

यह प्रदूषण फेफड़ों में कैंसर, अस्थमा तथा नाडीमण्डल के रोग, हृदय सम्बन्धी रोग, आँखों के रोग, एक्जिमा तथा मुहासे इत्यादि रोग फैलाता है।

(2) जल प्रदूषण

जल के बिना कोई भी जीवधारी, पेड़-पौधे जीवित नहीं रह सकते। इस जल में भिन्न-भिन्न खनिज तत्व, कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ तथा गैसें घुली रहती हैं, जो एक विशेष अनुपात में होती हैं, तो वे सभी के लिए लाभकारी होती है। लेकिन जब इनकी मात्रा अनुपात से अधिक हो जाती है; तो जल प्रदूषित हो जाता है और हानिकारक बन जाता है। जल के प्रदूषण के कारण अनेक रोग पैदा करने वाले जीवाणु, वायरस, औद्योगिक संस्थानों से निकले पदार्थ, कार्बनिक पदार्थ, रासायनिक पदार्थ, खाद आदि हैं। सीवेज को जलाशय में डालकर उपस्थित जीवाणु कार्बनिक पदार्थों का ऑक्सीकरण करके ऑक्सीजन का उपयोग कर लेते हैं जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और उन जलाशयों में मौजूद मछली आदि जीव मरने लगते हैं। ऐसे प्रदूषित जल से टॉयफाइड, पेचिस, पीलिया, मलेरिया इत्यादि अनेक रोग फैल जाते हैं। हमारे देश के अनेक शहरों को पेयजल निकटवर्ती नदियों से पहुँचाया जाता है और उसी नदी में आकर शहर के गन्दे नाले, कारखानों का बेकार पदार्थ, कचरा आदि डाला जाता है, जो पूर्णतः उन नदियों के जल को प्रदूषित बना देता है।

(3) रेडियोधर्मी प्रदूष

परमाणु शक्ति उत्पादन केन्द्रों और परमाणु परीक्षणों से जल,

वायु तथा पृथ्वी का सम्पूर्ण पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है और वह वर्तमान पीढ़ी को ही नहीं, बल्कि भविष्य में आने वाली पीढ़ी के लिए भी हानिकारक सिद्ध हुआ है। इससे धातुएँ पिघल जाती हैं और वह वायु में फैलकर उसके झोंकों के साथ सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त हो जाते हैं तथा भिन्न-भिन्न रोगों से लोगों को घसित बना देती हैं।

(4) ध्वनि प्रदूषण

आज ध्वनि प्रदूषण से मनुष्य की सुनने की शक्ति कम हो रही है। इसकी नींद बाधित हो रही है, जिससे नाड़ी संस्थान सम्बन्धी और नींद न आने के रोग उत्पन्न हो रहे हैं। मोटरकार, बस, जैट-विमान, ट्रैक्टर, लाउडस्पीकर, बाजे, सायरन और मशीनें अपनी ध्वनि के सम्पूर्ण पर्यावरण को प्रदूषित बना रहे हैं। इससे छोटे-छोटे कीटाणु नष्ट हो रहे हैं और बहुत-से पदार्थों का प्राकृतिक स्वरूप भी नष्ट हो रहा है।

(5) रासायनिक प्रदूषण

आज कृषक अपनी कृषि की पैदावार बढ़ाने के लिए अनेक सकार के रासायनिक खादों का, कीटनाशक और रोगनाशक दवाइयों का प्रयोग कर रहा है, जिससे वर्षों के समय इन खेतों से बहकर आने वाला जल, नदियों और समुद्रों में पहुँचकर भिन्न-भिन्न जीवों के ऊपर घातक प्रभाव डालता है और उनके शारीरिक विकास पर भी इसका दुष्परिणाम पहुँच रहा है।

प्रदूषण की समस्या का समाधान

पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पिछले कई वर्षों से विश्व भर में प्रयास किया जा रहा है। आज औद्योगीकरण ने इस प्रदूषण की समस्या को अति गम्भीर बना दिया है। इस औद्योगीकरण तथा जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न प्रदूषण को व्यक्तिगत और शासकीय दोनों ही स्तर पर रोकने के प्रयास आवश्यक हैं। भारत सरकार ने सन् 1974 ई. में जल प्रदूषण निवारण एवं नियन्त्रण अधिनियम लागू कर दिया है जिसके अन्तर्गत प्रदूषण को रोकने के लिए अनेक योजनाएँ बनायी गई हैं।

उद्योगों से उत्पन्न प्रदूषण को रोकने के लिए भारत सरकार ने अत्यन्त महत्त्वपूर्ण निर्णय यह लिया है कि वे उद्योग का लाइसेंस उसी स्थिति में देंगे, जिसमें औद्योगिक कचरे के निस्तारण की समुचित व्यवस्था की गई हो।

सबसे महत्त्वपूर्ण उपाय प्रदूषण को रोकने का ढूंढा गया है, वनों का संरक्षण। साथ ही, नये वनों का लगाया जाना तथा उनका विकास करना। जन-सामान्य में वृक्षारोपण की प्रेरणा दिया जाना, इत्यादि प्रदूषण की रोकथाम के सरकारी कदम हैं। इस बढ़ते हुए प्रदूषण के निवारण के लिए सभी लोगों में जागृति पैदा करना भी महत्त्वपूर्ण कदम है; जिससे जानकारी प्राप्त कर उस प्रदूषण को दूर करने के समन्वित प्रयास किये जा सकते हैं।

नगरों, कस्बों और गाँवों में स्वच्छता बनाये रखने के ygलिए सही प्रयास किये जायें। बढ़ती हुई आबादी के निवास के लिए समुचित और सुनियोजित भवन-निर्माण की योजना प्रस्तावित की जाय। प्राकृतिक संसाधनों का लाभकारी उपयोग करने तथा पर्यावरणीय विशुद्धता बनाये रखने के उपायों की जानकारी विद्यालयों में पाठ्यक्रम के माध्यम से शिक्षार्थियों को दिये जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

उपसंहार

इस प्रकार सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के द्वारा पर्यावरण की विशुद्धि के लिए समन्वित प्रयास किये जायेंगे, तो मानव समाज (सर्वे सन्तु निरामया) वेद वाक्य की अवधारणा को विकसित करके सभी जीवमात्र के सुख-समृद्धि की कामना कर सकता है।

Also Read

विज्ञान के चमत्कार Wonder of science essay

Wonder Of Science essays for class 9th and 10th in English

Wonder of science

Science is a good servant but a bad manner, advantage of science, Essay writing of ” Wonder of science in 450 words in English for class 7th, 8th, 9th 10th with the outline.

Outlines: 1. Significance in the modern age. 2. Changed our domestic life 3. Produced many deanactive weapons 4. People become lazy and dependent. 5. World has borne smaller. 6. Progress in the field of medical science. 7. Science and technology will continue to benefit society

Introduction – Modern age is the age of science. The world has become smaller. Science is a systematic way of knowledge and living. Man has reached the moon with the help of science. Science plays an important role in our life. It has made our life easier and more comfortable.

Scientific Wonders – Science has given us many wonderful gifts. The various inventions of science are its wonders. We cannot imagine our life without them.

Various Inventions – Electricity is the most useful gift of science. It gives us light. Heaters, fans, coolers, refrigerators, computers, etc., all work on electricity. It also runs machines and trains.

Medicine and Surgery – Science has given wonderful medicines. Vaccination helps us in preventing diseases like polio, cholera, smallpox, etc. It has brought down the death rate. Modern surgical equipment has made operations less painful.

Means of Communication -Today we amuse ourselves by watching television and listening to music on the radio and tape recorder. Television has become a powerful medium of education and knowledge. U.G.C. and IGNOU lessons on television are very useful. Fast means of transport and communication help us to reach distant places in a short time.

Computers – Scientists have invented computers. These are wonderful inventions. Computers can do complex calculations and work quickly. They have solved a lot of problems of man.

Disadvantages of Science – Everything has two sides. Science too has a dark side. The invention and production of atom bombs and other dangerous weapons are a great threat to the existence of humanity. They can destroy the world in seconds.

Secondly, big factories, mills, and other machines have polluted the atmosphere. Nowadays, even life-threatening viruses are being created in laboratories which are proving to be fatal for the entire living world.

Conclusion – In the end, one can conclude that science and technology do not make undesirable changes to lifestyles but merely upgrade life and thing related to it. Science and technology will only continue to benefit society because there will always be new problems popping up over time that will need something bigger, better, or a new cure.

Vigyan ke chamatkar essay in hindi विज्ञान के चमत्कार निबंध PDF

vigyan ke chamatkar niband hindi

450 शब्दों में विज्ञान के चमत्कार निबंध रूपरेखा सहित कक्षा 7वीं, 8वीं, 9वीं 10वी के लिए हिंदी में। Vigyan ke chamatkar essay for class 7th, 8th, 9th and 10th in hindi.

[रूपरेखा – (1) प्रस्तावना, (2) आवागमन के साधन, (3) बिजली वरदान स्वरूप, (4) कृषि में योगदान, (5) चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान, (6) श्रम की बचत, (7) अन्तरिक्ष के क्षेत्र में योगदान, (8) विज्ञान से हानि, (9) उपसंहार।]

प्रस्तावना – आज विज्ञान का युग है। विज्ञान ने विश्व में सभी क्षेत्रों में अपनी विजय पताका फहरा रखी है। यह अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आज के युग को यदि हम वैज्ञानिक युग का नाम दे दें। प्राचीन और आधुनिक काल में पूर्णत: विपरीतता आ गयी है। रहन-सहन, वस्त्र पहनावा, यातायात तथा जीवन प्रणाली पूर्णतः परिवर्तित हो गई है। उसमें नवीनता का समावेश हो चुका है। आज की दुनिया प्रतिक्षण बदलती दिखती है। परिवर्तन ही विकास है।

आवागमन के साधन-आज आवागमन के साधन भी विज्ञान की कृपा से सर्वसुलभ हो गये हैं। रेल, मोटर साइकिल, स्कूटर, तथा वायुयान इस क्षेत्र में अभूतपूर्व चुनौती दे रहे हैं। राष्ट्रीय पर्वो एवं शोक के अवसर पर समस्त राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्षों का एक मंच पर उपस्थित होना इस बात का ज्वलन्त उदाहरण है।

बिजली वरदान स्वरूप -बिजली प्रतिपल एक दासी की भाँति सेवा में जुटी रहती है। कारखाने, रेडियो, टेलीविजन बिजली

की सहायता से चलते हैं। बिजली से चलने वाले पंखे दुपहरी में निरन्तर चलकर मानव को परम शान्ति प्रदान कर रहे हैं।,

कृषि में योगदान – कृषि के लिए नये यन्त्र विज्ञान ने आविष्कृत किये हैं। विज्ञान द्वारा उपलब्ध रासायनिक खाद्य उत्पादन क्षमता में एवं रासायनिक दवाइयाँ फसल को नष्ट होने से रही हैं।

चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान – एक्स-रे शरीर का आन्तरिक फोटो लेकर अनेक बीमारियों का पता लगा रहा है। कैंसर तथा एड्स जैसे रोगों पर निरन्तर शोध जारी है। परमाणु शक्ति भी विज्ञान की ही देन है।

श्रम की बचत – विज्ञान के द्वारा आविष्कृत मशीनों के माध्यम से पूरे दिन का कार्य मनुष्य कुछ ही घंटों में समाप्त कर लेता है। बचे हुए समय को मनुष्य मनोरंजन या स्वाध्याय में व्यतीत करता है।

अन्तरिक्ष के क्षेत्र में योगदान -अन्तरिक्ष के क्षेत्र में भी आज मनु पुत्र अपने कदम बढ़ा चुका है। जो चन्दा मामा कभी बालकों के लिए अगम बना हुआ था, आज वैज्ञानिक उसके तल पर पहुँचने में सक्षम हुए हैं।

विज्ञान से हानि – हर अच्छाई के पीछे बुराई छिपी है। जहाँ विज्ञान ने मनुष्य को अनेक सुख सुविधाएँ प्रदत्त की हैं, वहाँ अशान्ति तथा दुःख का भी सृजन किया है।

अगर हम सावधानीपूर्वक विचार करें तो विदित होता है कि इसमें विज्ञान का इतना दोष नहीं है जितनी कि मानव की कुत्सित प्रवृत्तियाँ दोषी हैं।

उपसंहार – विज्ञान स्वयं में अच्छा-बुरा नहीं है। यह मानव के प्रयोग पर निर्भर है। आज विज्ञान के गलत प्रयोग के फलस्वरूप ही दुनिया में विनाशकारी दृश्य नजर आ रहा है। अतः आज हमें विज्ञान को मानव के कल्याण के निमित्त प्रयोग करके सुख एवं समृद्धि का साधन बनाना है। इसी में सबका हित सन्निहित है।

Pdf Download

पर्यायवाची शब्द (Paryayvachi Shabd) – 150+ महत्वपूर्ण समानार्थी शब्द

हिंदी पर्यायवाची शब्द (Paryayvachi Shabd)

एक समान अर्थ प्रकट करने वाले शब्द एक-दूसरे के पर्यायवाची (Paryayvachi Shabd) या समानार्थी शब्द कहलाते हैं। इस पोस्ट में परीक्षा की दृष्टि से अ से ज्ञ तक महत्वपूर्ण समानार्थी शब्द छाँट कर दिए गए हैं जो आपके लिए उपयोगी साबित होंगे।

अ से ज्ञ तक पर्यायवाची शब्द के उदाहरण

अतिथि– मेहमान, अभ्यागत, आगन्तुक।

आग– अग्नि, ज्वाला, अनल, पावक।

अमृत– सुरभोग सुधा, सोम, पीयूष।

अनुपम– अपूर्व, अतुल, अनोखा, अनूठा, अद्वितीय।

अलंकार– आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, जेवर।

अहंकार– अभिमान, मद, घमंड, मान।

अंग– अंश, हिस्सा, भाग।

आत्मा– जीवात्मा, रूह, जीव, अंतरात्मा।

जंगल – अरण्य, वन, कानन, विपिन।

अनादर– अपमान, अवज्ञा, अवहेलना, तिरस्कार।

अंकुश– रोक, दबाव, नियंत्रण, पाबंदी।

परिणाम -अंजाम, नतीजा, फल।

अंत– समाप्ति, समापन।

अंतरिक्ष– गगनमंडल, आकाशमंडल, नभमंडल।

अंदर– भीतर, आंतरिक, अंदरूनी।

अंदाज– अटकल, अनुमान, कयास।

अंधा– सूरदास, नेत्रहीन, दृष्टिहीन।

आकाश– अंबर, आसमान, गगन, नभ।

जल– पानी, नीर, पय, वारी।

सूरज– सूर्य, रवि, दिनकर, भास्कर।

बुद्धि– अक्ल- प्रज्ञा, मति, विवेक।

ईश्वर– परमात्मा, परमेश्वर, भगवान, खुदा।

कठिन– अगम दुष्कर, दुःसाध्य, अगम्य।

विचित्र– अजीब, अदभुत, अनोखा, विलक्षण।

अच्छा– बढ़िया, बेहतर, उत्तम।

अनपढ़– अपढ़, निरक्षर, अशिक्षित,।

अजनबी– अनजान, अपरिचित।

स्थिर– अचल, अटल, अविचल, अडिग।

अनिवार्य– अत्यावश्यक, परमावश्यक।

अतीत– भूत, भूतकाल, गत, विगत।

अनमोल– अमूल्य, कीमती, बहुमूल्य।

अध्ययन– पढ़ना, पढ़ाई, पठन-पाठन, पठन।

अनाथ– लावारिस, बेसहारा, अनाश्रित।

अनुज– अनुभ्राता, छोटा भाई, कनिष्ठ।

आईना– दर्पण, शीशा।

आचार्य– शिक्षक, अध्यापक, प्राध्यापक, गुरु।

100 महत्वपूर्ण पर्यायवाची या समानार्थी शब्द

अभिनंदन– अभिवादन, स्वागत, सत्कार,।

आँख– लोचन, नैन, नयन, नेत्र, चक्षु, विलोचन।

असत्य– मिथ्या, झूठ, असत।

अर्चना– पूजा, आराधना, पूजन।

अनुमति– इजाजत, स्वीकृति।

अभद्र– असभ्य, अकुलीन, अशिष्ट।

अनुरोध– आग्रह, प्रार्थना विनय, विनती।

आनंद– हर्ष, सुख, आमोद, प्रसन्नता।

क्रोध– आक्रोश, रोष, कोप, रिष।

आशीर्वाद– शुभकामना, आशिष, दुआ।

इन्द्र– वज्रधर, वज्री, देवेन्द्र, देवराज, महेन्द्र।

इच्छा– अभिलाषा, कामना, लालसा, मनोरथ, आकांक्षा।

चाँद– चंद्रमा, चंदा, शशि।

इजाजत– स्वीकृति, मंजूरी, अनुमति।

आरोप– इलजाम लांछन, दोषारोपण।

ईमानदारी– सच्चा, सत्यपरायण, सत्यनिष्ठ।

ईर्ष्या– जलन, कुढ़न, विद्वेष।

उचित– ठीक, मुनासिब, न्यायसंगत, योग्य।

उजला– श्वेत, सफ़ेद, धवल, उज्ज्वल।

उत्पति– जन्म, सृष्टि, आविर्भाव, उदय।

उपाय– युक्ति, यत्न, तरकीब।

उत्साह– उमंग, जोश, उछाह।

उद्देश्य– मकसद, लक्ष्य, प्रयोजन।

उन्नति– तरक्की, प्रगति, विकास, उत्कर्ष।

उपहार– भेंट, तोहफा, नजराना।

उम्मीद– आशा, आस, भरोसा।

हृदय– दिल, उर, वक्षस्थल।

सुबह– उषा, भोर, भिनसार, ब्रह्ममुहूर्त।

कर्ज– ऋण, कर्जा, उधार, उधारी।

ऐश्वर्य– समृद्धि, विभूति।

ओस– नीहार, तुहिन, शबनम।

औरत– स्त्री, महिला, नारी, घरवाली।

औलाद– संतान, संतति, बाल-बच्चे।

कमल– कंज, पद्म, पंकज, नीरज, सरोज, जलज, जलजात।

किरण– रश्मि, मयूख, ज्योति, प्रभा।

कपड़ा– वस्त्र, चीर, वसन, अम्बर, परिधान।

किनारा– तट, तीर, कूल, कगार।

कण्ठ– गला, ग्रीवा, गर्दन, शिरोधरा।

कृपा– अनुकम्पा, दया, अनुग्रह।

कान– कर्ण, श्रवण, श्रोत, श्रुतिपुट।

निर्धन– कंगाल, गरीब, रंक, धनहीन।

सोना– कनक, कंचन, स्वर्ण।

सम्मान – कद्र- मान, इज्जत, प्रतिष्ठा।

कमजोर– निर्बल, बलहीन, दुर्बल, शक्तिहीन।

कष्ट– पीड़ा, वेदना, तकलीफ, दुःख।

कायर– डरपोक, कापुरुष, बुजदिल।

पुष्प– कुसुम, फूल, प्रसून, पुहुप।

शेर– सिंह, वनराज, मृगराज, मृगेंद्र।

कीर्ति– यश, ख्याति, प्रतिष्ठा, शोहरत, प्रसिद्धि।

खाना– भोज्य सामग्री, आहार, भोजन।

खौफ– डर, भय, दहशत, भीति।

खून– रक्त, लहू, शोणित, रुधिर।

गाय– गौ, धेनु, सुरभि, रोहिणी।

गाना– गान, गीत, नगमा, तराना।

गेहूँ– कनक, गोधूम, गंदुम।

गोद– अंक, क्रोड़, गोदी।

गाँव– ग्राम, देहात, पुरवा, टोला।

घटना– हादसा, वारदात, वाक्या।

घर– आलय, आवास, निकेतन, निलय, निवास, भवन, वास, वास-स्थान।

घटना– हादसा, वारदात, वाक्या।

चरण– पद, पग, पाँव, पैर, पाद।

चाँदी– रजत, सौध, रूपा, रूपक, रौप्य, चन्द्रहास।

चंदन– गंधराज, गंधसार, मलयज।

पत्र– चिट्ठी, पाती, खत।

छवि– शोभा, सौंदर्य, कान्ति, प्रभा।

छाती– सीना, वक्ष, उर, वक्षस्थल।

छतरी– छत्र, छाता, छत्ता।

संसार– विश्व, जग, जगती, भव, दुनिया, लोक।

जीभ– जिह्वा, रसिका, वाणी, वाचा, जबान।

जंगल– विपिन, कानन, वन, अरण्य, विटप।

जननी– माँ, माता, वालिदा।

जासूस– गुप्तचर, भेदिया, खुफिया।

50 Paryayvachi Shabd

जिंदगी– जिंदगानी, जीवन, हयात।

जिस्म– शरीर, काया, देह, बदन, वपु।

झरना– स्रोत, प्रपात, निर्झर, प्रस्त्रवण।

पाँव– टाँग, पैर, टंक।

ठंड– ठंड, शीत, सर्दी।

डर– दहशत, खौफ, भय, भीति।

तालाब– सरोवर, जलाशय, पोखरा, जलवान।

तुला– तराजू, काँटा, धर्मकाँटा।

थोड़ा– जरा, कम, अल्प, न्यून,।

थल– स्थान, स्थल, भूमि, जगह।

स्तम्भ– थंभ- खंभ, खंभा।

दास– नौकर, चाकर, सेवक, अनुचर।

दुःख– पीड़ा, कष्ट, व्यथा, वेदना।

देवता– सुर, देव, अमर, वसु, आदित्य, निर्जर।

दिन– दिवस, वार, प्रमान, वासर।

दीपक– दीप, दीया, प्रदीप।

दया– अनुकंपा, करुणा, कृपा, संवेदना, सहानुभूति, सांत्वना।

दिनकर– भास्कर, सूरज, सूर्य, भानु, दिवाकर, रवि।

धन– दौलत, संपत्ति, सम्पदा, वित्त।

धीरज– सब्र, संतोष, तसल्ली, धैर्य, दिलासा।

ध्वनि– स्वर, ताल, नाद, रव, आवाज।

ध्वज– झंडा, ध्वजा, केतन, केतु।

नर्क– नरक, यमलोक, यमपुर, यमालय।

नेत्र– आँख, चक्षु, लोचन, नयन, अक्षि, चख।

निंदा– बुराई, दोषारोपण, फटकार।

बेटी– पुत्री, अंगजा, तनुजा, सुता, दुहिता।

नियम– उसूल, सिद्धांत, विधि, रीति।

न्यौता– आमंत्रण, निमंत्रण, बुलावा।

निवेदन– विनय, विनती, प्रार्थना, गुजारिश।

निर्दयी– निर्मम, संगदिल, क्रूर, कठोर।

पत्नी– भार्या, वधू, अर्धांगिनी, गृहणी, बहु, वनिता, जोरू, वामांगिनी।

पर्वत– पहाड़, गिरि, अचल।

पुष्प– फूल, सुमन, कुसुम।

पिता– जनक, तात, पितृ, बाप।

पेड़– तरु, द्रुम, वृक्ष, पादप, रुक्ष।

राहगीर– पथिक, राही, यात्री, मुसाफिर, पंथी।

पवन– वायु, हवा, समीर, समीरण।

अनेक– बहुत, अनेक, अतीव, अति, बहुल, अत्यन्त, असंख्य।

बाल– केश, चिकुर, चूल।

बुड्ढा– वृद्ध, बूढ़ा, बुजुर्ग, वयोवृद्ध।

मछली– मीन, मत्स्य।

मेघ– घन, जलधर, बादल, पयोद, अम्बुद, पयोधर।

यकीन– भरोसा, ऐतबार, आस्था, विश्वास।

याद– स्मरण-शक्ति, स्मृति, स्मरण, सुध, याद्दाश्त।

युद्ध– संग्राम, लड़ाई, रण, द्वंद्व।

रात्रि– निशा, रैन, रात, यामिनी, रजनी, तमस्विनी, विभावरी।

विशाल– विराट, दीर्घ, वृहत, बड़ा, महान।

वसन्त– मधुमास, माधव, कुसुमाकर, ऋतुराज।

समूह– दल, झुंड, समुदाय, टोली।

हस्त– हाथ, बाहु, कर, भुजा।

Also read

100+ daily use English vocabulary words with meaning

Common English vocabulary words with meaning

We talk to many people every day and use many words in our conversations. If you want to learn English then for this you have to learn English dictionary with its meaning and use those vocabulary words in your own language. In this article, common English words used in daily life are given with Hindi meanings. Which will be helpful for you.

Vocabulary words with meaning

nglish words meaning

Apt – suitable in a particular situation.

Apologize – express regret for something that one has done wrong.

Challenge – to refuse a statement.

Alliance – an agreement between groups.

Grievance – something that you think is unfair.

Courage – The ability to do something that frightens one.

battle – a fight, especially between armies in a war.

Vibrant – full of energy and enthusiasm.

Pleasant – giving a sense of happy satisfaction or enjoyment.

Attempt – To try to obtain.

Miserable – wretchedly unhappy or uncomfortable.

Wrapped – overjoyed; delighted

Growing – come into existence and develop.

Self-control – to appear calm when you are angry.

Self-restraint – the ability to stop yourself.

Pastime = something you enjoy while not working.

Blessing = a thing that brings happiness.

Double-storey = a building with two floors.

Unique = not like anything else.

Simultaneously – happening, existing or done at the same time

Countrymen = a person from your own country.

Ideal = an idea that you want to achieve.

Laboratory = a room used for research, and testing.

Autumn – the season comes between summer and winter.

Eager – full of desire.

Graves – a place where the dead body is kept.

Wags – to move from side to side.

Minerals – a natural substance found in food.

Household – work that is needed in daily life in a house.

Picnic -an outdoor activity to enjoy meals and games.

Polite – having good manners.

Hold = the act of having.

Gardening = looking after a garden.

Unrelenting – not yielding in strength, severity, or determination.

Proud – Haughty,

Generate – to produce or create something

Justify – to give or be a good reason for something

Absence – the fact of being away from somewhere

Struck – past and past participle of the strike.

Trot – Run at a moderate pace with short steps.

Pay Attention – to somebody in order to hear him/her.

Complexion – the natural color of the skin.

Younger – not old.

Banish – to get rid of somebody/something

Conjugal – connected with marriage.

Intractable – hard to control or deal with.

Uproot – to tall a plant by the root.

Cringe – to feel embarrassed

Academic – connected with education, especially in schools and universities

Abnegation – the action of renouncing or rejecting something.

Characteristic – a quality that is typical of somebody

Delicense – deprive of a license.

Embrace – to put your arms around somebody as a sign of love, happiness, etc.

Foreign – belonging to a country that is not your own.

Destigmatizing – to remove associations of shame or disgrace from destigmatizing mental illness.

Eradicate – to destroy something completely

Efface – to make something disappear; to remove something

Functional – practical and helpful rather than attractive

Gratuitous – (used about an action) lacking any good reason or purpose and often having harmful effects

Gaffe – a mistake that a person makes in a social or public situation, especially something very embarrassing

Incessant – never stopping (and usually annoying)

Largesse – generosity in bestowing money or gifts upon others.

Flatter – to say nice things often in a way that is not sincere.

Modesty – not talking too much about your own qualities.

Trait – personality

Migrant – a person who moves from one place to another.

Philosophy – the study of nature and the meaning of the universe and of human life.

Astonished – very surprised

Strive – to try very hard to achieve something.

Contentment – the feeling of happiness or satisfaction.

Companion – a person that travels with you or spends a lot of time with you.

10 vocabulary words and meaning

Pivot – a central point.

Ailing – not in good health.

Retard – slower to develop.

Fatigue – extremely tired.

Facet – one part or a particular aspect.

Fascinate – to attract very much.

Borne – carried by the thing.

Strive – make great efforts to achieve or obtain something.

Toil – work extremely hard or incessantly.

Idle – not active or in use.

Related posts

Hindi stories writing कहानी लेखन कैसे किया जाता है?

Hindi stories writing कहानी लेखन

कहानी लेकन (Story writing) की कला निरंतर प्रयास द्वारा सीखी जा सकती है। एक छोटी कहानी को तीन हिस्सों में बंटा जा सकता है। 1. शीर्षक (heading), 2. कथावस्तु (Plot), 3. शिक्षा (Moral)। लेखक अच्छी कहानी लिखने हेतु कथा-वस्तु का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक होता है, जिससे वह सभी घटनाक्रमों को निरंतर रूप से क्रमबद्ध लिख सके।

एक लेखक पाठकों को नैतिक संदेश देने के लिए अपनी कल्पना और विचारों को कहानी के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।

कहानी किसे कहते हैं?

कहानी का शाब्दिक अर्थ है कहना। जो कुछ भी कहा जाये, कहानी है: किन्तु विशिष्ट अर्थ में किसी रोचक घटना का वर्णन कहानी है। कहानी के अनिवार्य लक्षण हैं- (1) गद्य में रचित होना। (2) मनोरंजन या कौतुहल वर्धक होना। (3) अंत में किसी चमत्कारपूर्ण घटना की योजना।

विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा (Moral) को उजागर करने वाली कहानी लिखने के लिए कहा जा सकता है। छात्रों में कहानी लेखन करने हेतु निम्न बिन्दुओं को शामिल करना अत्यंत आवश्यक होगा

कहानी लिखते समय इन बातो को ध्यान रखना चाहिए।

कथावस्तु (Plot) को भली-भांति समझने हेतु संकेतों (outlines) को बार-बार पढना आवश्यक होगा।

  • संकेतानुसार प्रमुख घटनाओं को क्रमबद्ध लिखें।
  • कहानी को हमेशा past time में लिखें, चाहे outlines presenttense में ही क्यों न दे रखी हों।
  • कहानी लेखन में सरल व सहज भाषा का प्रयोग करना चाहिए जिससे पाठक आशानी से समझ सके।
  • सुन्दर एवं आकर्षण कहानी लिखने हेतु वार्तालाप का ढंग अपनाया जा सकता है।
  • कहानी में मुहावरे तथा लोकोक्तियों का प्रयोग करके और भी रोमांचक बनाया जा सकता है।
  • यदि हमें घटना क्रम के बिन्दुओं को एक-दूसरे से मिलाना हो तो अपनी कल्पनाशक्ति का प्रयोग भी कर सकते हैं।
  • किसी भी कहानी का उचित शीर्षक होना अत्यंत आवश्यक होता है।
  • कहानी के अंत में नैतिक शिक्षा अवश्य लिखनी चाहिए।
  • यदि कहानी पूरी हो जाए तो दुबारा अवस्य दोहराएं जिससे ग्रामर और spellings की अशुद्धियों को सुधारा जा सके।

Hindi stories writing examples

नैतिक शिक्षा पर आधारित एक ख़रगोश और शिकारी भेड़िया की कहानी जो हमें मुस्किल परिस्थितियों का सामना करना सिखाती है। प्रस्तुत कहानी पंचतंत्र से ली गयी है।

ख़रगोश और शिकारी भेड़िया

एक जंगल में एक खरगोश रहता था। वह रोज हर शाम को खुले मैदान में घूमता और हरी घास खाया करता था। एक दिन एक भेड़िये की नजर खरगोश पर पड़ी, वह खरगोश का शिकार करने के लिए उसकी तरफ दौरा, पर खरगोश जैसे – तैसे जान बचा कर वहाँ से भाग निकला।

बेचारा खरगोश इतना डर गया की वह दो-तीन तक मैदान में घास चरने नहीं गया। एक दिन जब ख़रगोश फिर से घास चरने गया, उसनें थोड़ी घास खायी की फिर से वही भेड़िया आ पंहुचा। खरगोश इस बार भी जान बचा कर भाग गया।

अब वह उस भेड़िये से पदेशान होकर एक बरगद के पेड़ के पास गया और अपनी समस्या उस पेड़ को सुनायी। उस अनुभवी पेड़ ने कहा कि मैं यहां वर्षों से खड़ा हूँ, मैनें यही देखा हैं कि जो खरगोश डर जाते हैं, और दौड़ते समय किसी झाड़ी में फंस जाते हैं। भेड़िया सिर्फ उन्हीं का शिकार कर पाते हैं, क्योंकि खरगोश के दौड़ने की गति भेड़िया से बहुत ज्यादा हैं।

अगर तुम उससे डरना बंद कर दो तो वह तुम्हें कभी भी पकड़ नहीं पायेगा। उस दिन के बाद वह भेड़िया कितनी भी कोशिस करता रह गया लेकिन वह कभी भी ख़रगोश को पकड़ नहीं सका।

शिक्षा – जिसे अपने आप पर भरोसा होता हैं , दुश्मन उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता हैं।

Related Post

Categories